भारत की विकास यात्रा के प्रेरक के रूप में डीप टेक नवाचार 

पाठ्यक्रम: GS3/विज्ञान एवं  प्रौद्योगिकी

संदर्भ

  • केंद्रीय शिक्षा मंत्री ने आईआईटी बॉम्बे में आयोजित भारत इनोवेट्स डीप-टेक प्री-समिट के समापन सत्र को संबोधित करते हुए कहा कि “भारत इनोवेट्स” वैश्विक नवाचार केंद्र के रूप में भारत के उभरते स्वरूप का प्रतिबिंब है।

भारत इनोवेट्स 2026

  • भारत इनोवेट्स भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय का एक राष्ट्रीय कार्यक्रम है।
  • इसे भारत के उच्च शिक्षा एवं अनुसंधान पारिस्थितिकी तंत्र से उभरने वाले  डीप टेक उद्यमों के लिए एक वैश्विक त्वरक तथा सहयोगात्मक ढाँचे के रूप में विकसित किया गया है।
  • मुख्य उद्देश्य: यह कार्यक्रम भारत के अग्रणी  डीप टेक  स्टार्टअप्स एवं अनुसंधान पार्कों को निवेशकों, कॉरपोरेट संस्थाओं तथा विभिन्न देशों की सरकारों सहित वैश्विक हितधारकों से जोड़ने हेतु दीर्घकालिक सहयोग सेतु के रूप में कार्य करता है।
  • प्रौद्योगिकी फोकस: यह कार्यक्रम 13 उभरते एवं अग्रणी प्रौद्योगिकी क्षेत्रों में नवाचारों को प्रोत्साहित करता है, जिनमें प्रमुख हैं—
    • सेमीकंडक्टर
    • जैव-प्रौद्योगिकी
    • अंतरिक्ष एवं रक्षा प्रौद्योगिकी
    • कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) एवं क्लाउड कंप्यूटिंग
    • हरित ऊर्जा
    • स्मार्ट गतिशीलता 

 डीप टेक क्या है?

  •  डीप टेक  से आशय ऐसी उन्नत एवं परिवर्तनकारी प्रौद्योगिकियों से है, जिनमें व्यापक संरचनात्मक परिवर्तन लाने तथा भविष्य की चुनौतियों के समाधान प्रदान करने की क्षमता होती है।
  • यह शब्द अत्याधुनिक अनुसंधान एवं नवाचार के उन क्षेत्रों के लिए प्रयुक्त होता है, जैसे—
    • नैनो प्रौद्योगिकी
    • जैव-प्रौद्योगिकी
    • पदार्थ विज्ञान (Material Sciences)
    • क्वांटम प्रौद्योगिकी
    • सेमीकंडक्टर
    • कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI)
    • डेटा विज्ञान
    • रोबोटिक्स
    • त्रि-आयामी मुद्रण (3D Printing)

भारत की  डीप टेक  महत्वाकांक्षाओं का महत्व

  • वैश्विक नेतृत्व: यह भारत को “चीन+1” वैश्विक रणनीति के परिप्रेक्ष्य में एक विश्वसनीय अनुसंधान एवं विकास (R&D) केंद्र के रूप में स्थापित करता है।
    • भारत की विशाल STEM (विज्ञान, प्रौद्योगिकी, अभियांत्रिकी एवं गणित) प्रतिभा शक्ति उसे क्वांटम कंप्यूटिंग एवं 6G जैसी अग्रणी प्रौद्योगिकियों में नेतृत्व प्रदान कर सकती है।
  • प्रौद्योगिकीय संप्रभुता: यह राष्ट्रीय सुरक्षा, रक्षा एवं अंतरिक्ष जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में विदेशी आयातों पर निर्भरता को कम करता है तथा वैश्विक आपूर्ति शृंखला व्यवधानों के प्रति भारत की संवेदनशीलता को घटाता है।
  • स्थानीय चुनौतियों का समाधान:  डीप टेक  भारत-केंद्रित समाधानों को विकसित करने में सहायक है, जैसे—
    • ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता
    • खाद्य सुरक्षा हेतु परिशुद्ध कृषि 
    • ऊर्जा आत्मनिर्भरता के लिए हरित हाइड्रोजन
  • आर्थिक मूल्य संवर्धन: एक सशक्त  डीप टेक  पारिस्थितिकी तंत्र भारत को वैश्विक मूल्य शृंखला में उच्च स्थान प्राप्त करने में सक्षम बनाता है तथा उसे कम लागत वाली सेवाओं एवं संयोजन-आधारित विनिर्माण से आगे बढ़ाकर उच्च मूल्य अनुसंधान, अभिकल्पना एवं बौद्धिक संपदा सृजन की दिशा में अग्रसर करता है।

भारत के  डीप टेक  पारिस्थितिकी तंत्र के समक्ष चुनौतियाँ

  • अनुसंधान एवं विकास पर कम व्यय: भारत का सकल अनुसंधान एवं विकास व्यय (GERD) सकल घरेलू उत्पाद (GDP) का लगभग 0.64 प्रतिशत है, जो अमेरिका, चीन, दक्षिण कोरिया एवं इज़राइल जैसे प्रमुख नवाचार-आधारित देशों की तुलना में बहुत कम है।
  • निजी क्षेत्र की सीमित भागीदारी: अनुसंधान एवं विकास व्यय का अधिकांश भाग सार्वजनिक संस्थानों द्वारा वहन किया जाता है, जबकि निजी क्षेत्र का योगदान लगभग 36 प्रतिशत है, जो उन देशों की तुलना में काफी कम है जहाँ उद्योग क्षेत्र 70 प्रतिशत से अधिक निवेश करता है।
  • वित्तपोषण संबंधी बाधाएँ: भारत में उद्यम पूंजी का अधिकांश निवेश फिनटेक एवं ई-कॉमर्स जैसे त्वरित प्रतिफल वाले क्षेत्रों में केंद्रित है, जबकि  डीप टेक  उद्यमों को उच्च जोखिम निवेश, धैर्यपूर्ण पूंजी तथा दीर्घ विकास अवधि की आवश्यकता होती है।
  • सेमीकंडक्टर निर्भरता: भारत अभी भी सेमीकंडक्टर, उन्नत इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों एवं विनिर्माण अवसंरचना के लिए आयातों पर अत्यधिक निर्भर है, जिससे तकनीकी एवं आपूर्ति शृंखला संबंधी जोखिम उत्पन्न होते हैं।
  • प्रतिभा पलायन/ब्रेन ड्रेन  : बेहतर अनुसंधान अवसंरचना, वित्तीय सहायता एवं पारिश्रमिक के कारण बड़ी संख्या में कुशल शोधकर्ता एवं अभियंता विदेशों की ओर प्रवास करते हैं।
  • उद्योग–शैक्षणिक सहयोग की कमजोरी: विश्वविद्यालयों, अनुसंधान संस्थानों एवं उद्योगों के मध्य सीमित सहयोग के कारण प्रौद्योगिकी हस्तांतरण, पेटेंट के व्यावसायीकरण तथा अनुसंधान-आधारित नवाचारों के विस्तार में बाधा उत्पन्न होती है।
  • अग्रणी प्रौद्योगिकियों में वैश्विक प्रतिस्पर्धा: कृत्रिम बुद्धिमत्ता, क्वांटम प्रौद्योगिकी, जैव-प्रौद्योगिकी एवं उन्नत विनिर्माण क्षेत्रों में प्रमुख वैश्विक शक्तियों की तीव्र प्रगति भारत के लिए प्रतिस्पर्धात्मक चुनौती प्रस्तुत करती है।

भारत के  डीप टेक  पारिस्थितिकी तंत्र हेतु सरकारी पहलें

  • अनुसंधान, विकास एवं नवाचार (RDI) योजना निधि: यह योजना 6 वर्षों की अवधि के लिए 1 लाख करोड़ रुपये के परिव्यय के साथ प्रारंभ की गई है, जिसमें वित्त वर्ष 2025-26 हेतु 20,000 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इसका वित्तपोषण भारत की संचित निधि से किया जाएगा।
    • प्रमुख उद्देश्य: उदीयमान एवं रणनीतिक क्षेत्रों में निजी क्षेत्र को अनुसंधान, विकास एवं नवाचार गतिविधियों का विस्तार करने हेतु प्रोत्साहित करना।
    • उच्च प्रौद्योगिकी तत्परता स्तर वाली परिवर्तनकारी परियोजनाओं को वित्तीय सहायता प्रदान करना।
    • राष्ट्रीय महत्व एवं रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों के अधिग्रहण को समर्थन देना।
    • डीप-टेक फंड ऑफ फंड्स की स्थापना को सुगम बनाना।
  • राष्ट्रीय  डीप टेक  स्टार्टअप नीति (NDTSP): इस नीति का उद्देश्य वित्तपोषण, अनुसंधान के व्यावसायीकरण, बौद्धिक संपदा समर्थन, प्रतिभा विकास एवं सक्षम विनियामक व्यवस्था के माध्यम से भारत के  डीप टेक  पारिस्थितिकी तंत्र को सुदृढ़ करना है।
    • यह कृत्रिम बुद्धिमत्ता, सेमीकंडक्टर, क्वांटम कंप्यूटिंग, जैव-प्रौद्योगिकी एवं अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी जैसे अग्रणी क्षेत्रों पर विशेष बल देती है।
  • भारत सेमीकंडक्टर मिशन (ISM): भारत में सेमीकंडक्टर एवं डिस्प्ले विनिर्माण को प्रोत्साहन देने हेतु 76,000 करोड़ रुपये के वित्तीय परिव्यय के साथ प्रारंभ।
    • सेमीकंडक्टर फैब, ATMP सुविधाओं, चिप डिजाइन तथा संबंधित अवसंरचना के लिए 50 प्रतिशत तक वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है।
  • राष्ट्रीय क्वांटम मिशन (NQM): वर्ष 2023 में स्वीकृत।
    • अवधि: 2023–2031
    • उद्देश्य:
      • क्वांटम कंप्यूटिंग
      • क्वांटम संचार
      • क्वांटम संवेदन
      • क्वांटम पदार्थों
    • के क्षेत्र में राष्ट्रीय क्षमताओं का विकास।
  • अटल नवाचार मिशन (AIM): यह अटल इनक्यूबेशन केंद्रों (AICs) तथा अटल टिंकरिंग प्रयोगशालाओं (ATLs) के माध्यम से नवाचार एवं उद्यमिता को प्रोत्साहित करता है।

आगे की राह

  • अनुसंधान एवं विकास निवेश में वृद्धि: सार्वजनिक निवेश एवं निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ाकर भारत के सकल अनुसंधान एवं विकास व्यय (GERD) को GDP के कम-से-कम 2 प्रतिशत तक बढ़ाया जाना चाहिए।
  • उद्योग–शैक्षणिक सहयोग को सुदृढ़ करना: प्रमुख विश्वविद्यालयों एवं अनुसंधान संस्थानों के आसपास नवाचार समूह विकसित किए जाएँ, जिससे प्रौद्योगिकी हस्तांतरण एवं व्यावसायीकरण को गति मिल सके।
  • प्रतिभाओं को आकर्षित करना: अनुसंधान वित्तपोषण, शैक्षणिक स्वायत्तता एवं कैरियर अवसरों में सुधार कर प्रतिभा पलायन को कम किया जाए तथा वैश्विक वैज्ञानिक प्रतिभाओं को भारत की ओर आकर्षित किया जाए।
  • वैश्विक साझेदारियों को प्रोत्साहन : महत्त्वपूर्ण एवं रणनीतिक प्रौद्योगिकियों के क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय सहयोग का विस्तार किया जाए, साथ ही बौद्धिक संपदा अधिकारों एवं राष्ट्रीय हितों की सुरक्षा भी सुनिश्चित की जाए।

निष्कर्ष

  •  डीप टेक  नवाचार भारत को ज्ञान-आधारित, आत्मनिर्भर एवं उच्च-मूल्य अर्थव्यवस्था में रूपांतरित करने की क्षमता रखता है। अनुसंधान, नवाचार, प्रतिभा विकास तथा वैश्विक सहयोग को सुदृढ़ कर भारत न केवल अपनी घरेलू चुनौतियों का समाधान कर सकता है, बल्कि उभरती प्रौद्योगिकियों के क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व की दिशा में भी महत्वपूर्ण प्रगति कर सकता है।

Source: DD News

 

Other News of the Day

पाठ्यक्रम: GS2/स्वास्थ्य  संदर्भ  हाल ही में जारी सैम्पल रजिस्ट्रेशन सिस्टम (SRS) सांख्यिकीय रिपोर्ट 2024 के अनुसार भारत की कुल प्रजनन दर (TFR) घटकर 1.9 हो गई है। मुख्य बिंदु भारत की कुल प्रजनन दर (TFR), अर्थात किसी महिला द्वारा अपने प्रजनन काल (15-49 वर्ष) में जन्म दिए गए औसत बच्चों की संख्या, प्रतिस्थापन स्तर 2.1...
Read More

पाठ्यक्रम: GS2/स्वास्थ्य संदर्भ स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFHS )-6 के निष्कर्ष जारी किए हैं। परिचय  NFHS-6 का आयोजन वर्ष 2023-24 के दौरान स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा किया गया, जिसमें  अंतरराष्ट्रीय जनसंख्या विज्ञान संस्थान , मुंबई को नोडल एजेंसी के रूप में नियुक्त किया गया था। 715 जिलों...
Read More

पाठ्यक्रम: GS2/स्वास्थ्य  संदर्भ हाल ही में जारी राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-6 (NFHS-6) ने भारत में मोटापा एवं मधुमेह के मामलों में तीव्र वृद्धि को रेखांकित किया है, जो गैर-संचारी रोगों (NCDs) के बढ़ते भार का संकेत है। NFHS-6 के बारे में वर्ष 2023-24 में केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा आयोजित राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य...
Read More

पाठ्यक्रम: GS3/ भारतीय अर्थव्यवस्था संदर्भ भारत ने अपने सकल घरेलू उत्पाद (GDP) के आधार वर्ष को 2011-12 से बदलकर 2022-23 कर दिया है। इसके परिणामस्वरूप GDP के अनुमानों एवं आर्थिक वृद्धि दरों में संशोधन किया गया है, ताकि अर्थव्यवस्था की वर्तमान संरचना का अधिक यथार्थपरक प्रतिबिंब प्रस्तुत किया जा सके। GDP  शृंखला का पुनरीक्षण क्यों...
Read More

पाठ्यक्रम: GS2/शासन; GS3/जल संरक्षण संदर्भ भारत में बढ़ते जल-संकट, भूजल स्तर में निरंतर गिरावट तथा कृषि क्षेत्र की बढ़ती जल मांग के बीच जल बजट निर्धारण ग्रामीण जल शासन को सुदृढ़ बनाने के लिए एक महत्त्वपूर्ण उपकरण के रूप में उभरकर सामने आया है। जल बजट निर्धारण क्या है? जल बजट निर्धारण एक ऐसी व्यवस्थित...
Read More

INS सुदर्शिनी एवं लोकायन-26 अभियान पाठ्यक्रम: GS3 / रक्षा संदर्भ भारतीय नौसेना के नौकायन प्रशिक्षण पोत  INS सुदर्शिनी ने लोकायन-26 अभियान के अंतर्गत ऐतिहासिक अटलांटिक महासागर पार यात्रा सफलतापूर्वक पूर्ण करने के पश्चात एंटीगुआ एवं बारबुडा में प्रवेश किया।  INS सुदर्शिनी के बारे में  INS सुदर्शिनी भारतीय नौसेना का एक नौकायन प्रशिक्षण पोत है, जिसे...
Read More
scroll to top